यमकेश्वर विधानसभा में बदलाव की आहट, समाजसेवी नेगी बनते जा रहे हैं जनता की पहली पसंद

देहरादून : जनपद पौड़ी गढ़वाल की यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी रण के संकेत बदले-बदले नज़र आ रहे हैं। क्षेत्र में बदलाव की बयार तेज़ है और मतदाताओं के रुझान स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि जनता इस बार नए नेतृत्व को अवसर देने के मूड में है। यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र आज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है, जहाँ जनता बदलाव की अपेक्षा कर रही है। वर्षों से चली आ रही राजनीति से इतर अब क्षेत्र के लोग ऐसा नेतृत्व चाहते हैं, जो ज़मीन से जुड़ा हो और विकास को प्राथमिकता दे।

यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र एक ठाकुर बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है, जहाँ लगभग 65 प्रतिशत आबादी ठाकुर समाज की है। ऐसे में सामाजिक स्वीकार्यता और क्षेत्रीय जुड़ाव चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाते हैं। ठाकुर बाहुल्य इस क्षेत्र में सामाजिक जुड़ाव और क्षेत्रीय पहचान हमेशा निर्णायक रही है। कस्याली गाँव निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी विश्वजीत सिंह नेगी इसी जुड़ाव के कारण जनता के बीच विश्वास का प्रतीक बनते जा रहे हैं। उन्होंने केवल राजनीति नहीं, बल्कि समाजसेवा और क्षेत्रीय विकास को अपना उद्देश्य बनाया है।

विश्वजीत सिंह नेगी लंबे समय से यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी निरंतर सक्रियता ने उन्हें आमजन के करीब पहुंचाया है। हाल ही में उनकी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई मुलाकात ने क्षेत्रीय विकास को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं। इस बैठक में यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े अहम विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसके बाद क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार तेज़ होती दिखाई दे रही है।

क्षेत्रीय जनता का मानना है कि विश्वजीत सिंह नेगी ज़मीनी समझ, प्रशासनिक अनुभव और समाजसेवा की प्रतिबद्धता के साथ एक सशक्त विकल्प बनकर उभरे हैं। यही कारण है कि इस बार यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के मतदाता खुलकर यह कहने लगे हैं कि विधायक के रूप में उनकी पहली पसंद विश्वजीत सिंह नेगी ही हैं।

गौरतलब है कि उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से इस सीट पर महिलाओं का दबदबा रहा है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल में मतदाता बदलाव के स्पष्ट संकेत दे रहे हैं। जनभावनाओं का रुख बताता है कि इस बार यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में नेतृत्व परिवर्तन संभव है और यह परिवर्तन विश्वजीत सिंह नेगी के पक्ष में जाता दिख रहा है। कुल मिलाकर, यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक तापमान चढ़ चुका है और विश्वजीत सिंह नेगी एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरते नज़र आ रहे हैं – जिन्हें जनता विकास, संवाद और भरोसे का प्रतीक मान रही है।

यमकेश्वर विधानसभा : सामाजिक समीकरण और बदलता राजनीतिक मिज़ाज

यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र हमेशा से सामाजिक संतुलन और स्थानीय नेतृत्व के आधार पर मतदान करने वाला क्षेत्र रहा है। लगभग 65 प्रतिशत ठाकुर आबादी होने के कारण यहाँ समुदाय की स्वीकार्यता किसी भी प्रत्याशी के लिए अहम मानी जाती है। उत्तराखंड बनने के बाद इस सीट पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व रहा, जिसने क्षेत्र की राजनीति को एक निश्चित दिशा दी। लेकिन वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में परिस्थितियाँ बदलती दिखाई दे रही हैं। क्षेत्र में विकास से जुड़े मुद्दे – जैसे सड़क, स्वास्थ्य सेवाएँ और शिक्षा – अब मतदाताओं की प्राथमिकता बन चुके हैं।

इसी बदलाव के बीच वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी विश्वजीत सिंह नेगी का नाम प्रमुखता से उभर रहा है। उनकी ज़मीनी सक्रियता, प्रशासनिक समझ और सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक सीधी पहुँच उन्हें अन्य दावेदारों से अलग बनाती है। मुख्यमंत्री से उनकी हालिया मुलाकात को राजनीतिक विश्लेषक यमकेश्वर के लिए एक निर्णायक मोड़ के रूप में देख रहे हैं। यदि यही रुझान बना रहा, तो यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में नेतृत्व परिवर्तन की प्रबल संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यमकेश्वर का सवाल : परंपरा या परिवर्तन?

यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र आज एक अहम सवाल के सामने खड़ा है – क्या वह पुरानी राजनीतिक परंपराओं के साथ आगे बढ़े या विकास-केंद्रित नए नेतृत्व को अवसर दे? क्षेत्र की जनता लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की मज़बूती, बेहतर सड़क संपर्क और स्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षा कर रही है। ऐसे समय में समाजसेवा और पत्रकारिता से जुड़े विश्वजीत सिंह नेगी का उभार इस बात का संकेत है कि जनता अब ज़मीनी समझ रखने वाले नेतृत्व को प्राथमिकता देना चाहती है।

मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात केवल एक राजनीतिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि यमकेश्वर के मुद्दों को सीधे सत्ता के केंद्र तक पहुँचाने का प्रयास मानी जा रही है। यदि राजनीति का उद्देश्य जनसेवा है, तो यमकेश्वर का मौजूदा मूड इस सिद्धांत को दोहराता नज़र आता है। बदलाव आसान नहीं होता, लेकिन जब जनभावनाएँ स्पष्ट हों, तो लोकतंत्र नई दिशा तय करता है।

Portaladmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Like

Chief Editor

Ravi Priyanshu

Share
error: Content is protected !!