उत्तराखण्ड : संसद में थमी महिला अधिकारों की गूँज, विधानसभा अध्यक्षा ने जताया दुःख

देहरादून : संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न हो पाने और इसके क्रियान्वयन से जुड़ी प्रक्रिया के बाधित होने पर उत्तराखण्ड विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण ने गहरा दुख व्यक्त किया है।

उन्होंने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र और देश की महिलाओं के लिए “काला दिवस” करार देते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक अवसर था, जो दुर्भाग्यवश हाथ से निकल गया।

ऋतु खंडूरी ने कहा, “यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के सम्मान, अधिकार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय है।” उन्होंने आगे कहा कि 18 अप्रैल का दिन भारत के संसदीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो सकता था, लेकिन प्रक्रिया रुकने से यह सपना अधूरा रह गया।

हालांकि, उन्होंने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि वर्ष 2014 से केंद्र सरकार लगातार महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रही है।

उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि आने वाले समय में देश की लगभग 50% महिला आबादी को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे महिलाएं नीति निर्माण में और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।

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